पाठशाला में सहस्रनाम स्रोत, तत्त्वार्थसूत्र आदि नई तकनीक से पढ़ा सकते हैं? शंका बाल्यावस्था में ग्रहण किया गया ज्ञान अन्तिम क्षण तक भी धारणा में बना रहता है। जब हम…
जैन समाज की शिक्षण संस्थाओं का प्रबंधन कैसे हो? शंका संस्कृति, सभ्यता, सदाचार, संस्कार की स्थापना में एक शिक्षक और शिक्षण संस्थान की क्या भूमिका होती है? ऐसी परिस्थितियों में…