पाठशाला में सहस्रनाम स्रोत, तत्त्वार्थसूत्र आदि नई तकनीक से पढ़ा सकते हैं?

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शंका

बाल्यावस्था में ग्रहण किया गया ज्ञान अन्तिम क्षण तक भी धारणा में बना रहता है। जब हम आज पाठशाला के अन्तर्गत बच्चों को जो विद्या अध्ययन कराते हैं तो उसके बारे में आपने कल बताया कि हमको आधुनिक टेक्नोलॉजी के हिसाब से अध्ययन कराना चाहिए ताकि उनका विकास हो सके। मेरा भाव यह है कि हम जिन सहस्रनाम स्रोत, तत्वार्थ सूत्र आदि को किस प्रकार से उस टेक्नोलॉजी से पढ़ायें?

समाधान

सब सम्भव है। उसके लिए एक वर्कशॉप करना चाहिए। आज अध्यापकों को उसको सिखाने की आवश्यकता है। हम लोग बच्चों को रटाते हैं पर रटाने की जगह उसको अन्य तरीके से उसको demonstrate (प्रदर्शित) करके भी सिखाया जा सकता है। इसकी एक तकनीक है जो मैं यहाँ नहीं बोल सकता, इसे विकसित करना चाहिए और यह सारी तकनीक विकसित की जा सकती है।

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