मुनिश्री का विशेष संबोधन

सर्वमान्य सत्य है की कुछ शताब्दियों पूर्व तक भारत विश्व में धर्मगुरु एवं पथ प्रदर्शक के रूप में स्थापित था विश्व भर से प्रशिक्षु भारतवर्ष की पावन धरा पर अपनी ज्ञान पिपासा बुझाने के लिए आते थे मध्यकाल में कुछ आक्रमक आतीतायो एवं विध्वंसको के कारण भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न मंदिरों एवं संस्थानों का विनाश कर दिया गया । जिसके कारण भारतीय ज्ञान गंगा जो समस्त विश्व का कल्याण करती थी अवरुद्ध हो गई ।
हर्ष का विषय है कि आज भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व विश्व भर में प्रतिष्ठित हो रहा है इसी कड़ी में भारत की जानी – मानी यूनिवर्सिटी रिशीहूद सोनीपत हरियाणा की पहल पर राष्ट्रम स्कूल ऑफ पब्लिक लीडरशिप के द्वारा एवं भारत सरकार की यूजीसी,एचआरडीसी, आई आई टी खड़कपुर, सेंटर फॉर प्रोफेशनल डेवलपमेंट दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑल इंडिया, काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन आदि संस्थाओ के सहयोग से पुनः इस विश्वव्यापी वेबीनार के माध्यम से दुनिया भर में भारतीय ज्ञान परंपरा के जाने-माने विद्वानों को प्रतिष्ठित करने का कार्यक्रम रखा गया है| जैन धर्म के विषय में संबोधन देने के लिए हमारे परम पूज्य गुरुदेव मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज को निवेदन किया गया था, जिसके लिए गरुदेव ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

गुरुदेव के द्वारा संबोधन 23 नवंबर अपराहन 2:00 बजे से 3:30 बजे तक उपर्युक्त लिंक पर आयेगा।

आपसे निवेदन है इस वेबीनार में समय पर अवश्य भाग ले और गुरुदेव के द्वारा परिभाषित जैन दर्शन की विवेचना और व्याख्या का लाभ लें |

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गुणायतन, श्री सम्मेद शिखरजी

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