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जैन धर्म

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तीर्थक्षेत्रों पर हर वेदी के भावपूर्ण दर्शन सम्भव नहीं, क्या करें?

तीर्थक्षेत्रों पर हर वेदी के भावपूर्ण दर्शन सम्भव नहीं, क्या करें? शंका तीर्थों में हर दो-दो कदम पर वेदियाँ बनी होती हैं। मन्दिरों के दर्शन करने में धोंक देना और…

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यदि मनुष्य पर्याय सर्वश्रेष्ठ है तो विधान में इंद्र बनकर पूजा क्यों?

यदि मनुष्य पर्याय सर्वश्रेष्ठ है तो विधान में इंद्र बनकर पूजा क्यों? शंका मनुष्य पर्याय सर्वश्रेष्ठ होती है क्योंकि मनुष्य पर्याय में ही मोक्ष जाया जा सकता है। फिर हम…

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डाक्टरी और धर्म में कैसे सामंजस्य बनाये?

डाक्टरी और धर्म में कैसे सामंजस्य बनाये? शंका डॉक्टर होते हुए मैं अपने व्यवसाय में और अपने धर्म में किस प्रकार सामंजस्य बिठा सकता हूँ? समाधान धर्म का सम्बन्ध अपनी…

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क्या विदेह क्षेत्र में भी जिन चैत्यालय होते हैं?

क्या विदेह क्षेत्र में भी जिन चैत्यालय होते हैं? शंका विदेह क्षेत्र में सीमन्धर स्वामी का समवसरण विचरण करता रहता है। क्या वहाँ पर भी भरत क्षेत्र जैसे चैत्यालय हैं,…

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तीर्थंकर हितोपदेश देकर भी उसके पुण्य से अलिप्त कैसे रहते हैं?

तीर्थंकर हितोपदेश देकर भी उसके पुण्य से अलिप्त कैसे रहते हैं? शंका ऐसा कहा जाता है कि हितोपदेश देने से पुण्य अर्जित होता है। हमारे तीर्थंकर हितोपदेश देते हैं तो…

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