राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान
(National Saint Safety Campaign)
राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान
(अहिंसा • संवेदना • सुरक्षा)
ज्ञापन (Memorandum)
सेवा में,
1. माननीय राष्ट्रपति महोदया, भारत गणराज्य, नई दिल्ली
2. माननीय प्रधानमंत्री महोदय, भारत सरकार, नई दिल्ली
3. माननीय गृह मंत्री महोदय, भारत सरकार, नई दिल्ली
4. माननीय मुख्यमंत्री महोदय, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल
5. माननीय मुख्य सचिव महोदय, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल
(द्वारा: जिलाधिकारी / कलेक्टर महोदय, ज़िला - .......................................)
विषय: रीवा में पूज्य आर्यिकाओं की दुःखद मृत्यु की घटना के संदर्भ में संत समाज की सुरक्षा हेतु त्वरित न्याय एवं 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' के निर्माण बाबत।
महोदय / महोदया,
सविनय निवेदन है कि भारत की संत परम्परा केवल किसी एक धर्म या समाज की धरोहर नहीं है, अपितु यह भारतीय संस्कृति, नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा की जीवंत परम्परा का प्रतिनिधित्व करती है। हजारों वर्षों से साधु-संत, मुनि, आर्यिकाएँ एवं तपस्वी समाज को संयम, सदाचार, करुणा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते रहे हैं।
हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा क्षेत्र में पूज्य आर्यिकाओं की वाहन दुर्घटना में हुई दुःखद मृत्यु ने सम्पूर्ण देश के धर्मप्रेमी नागरिकों को गहरे दुःख एवं चिंता में डाल दिया है। यह घटना केवल कुछ व्यक्तियों की मृत्यु नहीं, बल्कि उस संत परम्परा की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जो निःस्वार्थ भाव से समाज के नैतिक निर्माण में लगी हुई है।
इस घटना के विरोध एवं संत सुरक्षा की मांग को लेकर दिनांक 25 मई को देशव्यापी मौन रैली, श्रद्धांजलि सभाएँ एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें समाज के लाखों लोगों ने भाग लेकर अपनी गहरी पीड़ा एवं चिंता व्यक्त की।
एक जिम्मेदार नागरिक समूह और 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान' के अंतर्गत, हम इस ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं:
1. संत समाज का राष्ट्रीय महत्व
भारत की सांस्कृतिक पहचान में संतों का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, आदि शंकराचार्य, कबीर, तुलसी, नानक, रामकृष्ण, विवेकानन्द और अनेक संत-महात्माओं ने भारतीय समाज को नैतिक दिशा प्रदान की है। आज भी जैन मुनि एवं आर्यिकाएँ नंगे पाँव हजारों किलोमीटर विहार करते हुए अहिंसा का संदेश देते हैं, व्यसनमुक्ति का अभियान चलाते हैं, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। ऐसी विभूतियों की सुरक्षा केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय दायित्व है।
2. वर्तमान परिस्थितियों की चुनौतियाँ
वर्तमान समय में संतों के पैदल विहार के दौरान अनेक गंभीर संकट उत्पन्न हो रहे हैं:
- सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा: तीव्र गति से चलने वाले भारी वाहन, अवव्यवस्थित सड़कें एवं मार्गों पर पर्याप्त चेतावनी संकेतों (Warning Signs) का अभाव।
- प्रशासनिक समन्वय की कमी: अनेक स्थानों पर संत विहार की पूर्व सूचना होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं यातायात विभाग के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं बन पाता है।
- मानक सुरक्षा व्यवस्था (SOP) का अभाव: देश में संतों एवं आर्यिकाओं की सुरक्षा हेतु कोई एकीकृत नीति या प्रोटोकॉल उपलब्ध नहीं है।
3. रीवा घटना की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच (न्यायिक अपेक्षा)
हम शासन से दृढ़तापूर्वक आग्रह करते हैं कि:
- इस संपूर्ण प्रकरण की एक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- जांच समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए एवं रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- दोषियों पर सुसंगत दंडात्मक धाराओं (जैसे गैर-इरादतन हत्या आदि) के अंतर्गत कठोर एवं त्वरित कानूनी कार्यवाही की जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलम्ब न हो।
- कानून का यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि "न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।"
4. 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' का निर्माण
हम भारत सरकार एवं राज्य सरकारों से अनुरोध करते हैं कि पूरे देश के लिए एक समग्र “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति (National Saint Safety Policy)” बनाई जाए, जिसमें निम्न प्रावधान अनिवार्य रूप से सम्मिलित हों:
- संत विहार सुरक्षा प्रोटोकॉल: विहार मार्ग का पूर्व सर्वेक्षण, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान एवं स्थानीय प्रशासन को पूर्व सूचना देने की पारदर्शी व्यवस्था।
- संत सुरक्षा समन्वय अधिकारी: प्रत्येक जिले में एक 'नोडल अधिकारी' नियुक्त किया जाए, जो संत विहार से संबंधित यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का समन्वय करे।
- यातायात सुरक्षा व्यवस्था: विहार मार्गों पर गति नियंत्रण, बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत एवं आवश्यकतानुसार पुलिस एस्कॉर्ट का सहयोग।
- आपातकालीन सहायता प्रणाली: 24x7 संत सुरक्षा हेल्पलाइन, एम्बुलेंस समन्वय एवं त्वरित राहत तंत्र की स्थापना।
5. राष्ट्रीय / राज्य संत सुरक्षा आयोग का गठन
हम मांग करते हैं कि केंद्र एवं राज्य स्तर पर “संत सुरक्षा आयोग” अथवा “संत सुरक्षा प्रकोष्ठ” का गठन किया जाए, जिसका मुख्य कार्य संत सुरक्षा से संबंधित शिकायतों का संज्ञान लेना, सुरक्षा मानकों की निगरानी करना एवं विभिन्न राज्यों के पुलिस विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना हो।
6. जन-जागरण एवं संवेदनशीलता अभियान
संतों की सुरक्षा केवल पुलिस व्यवस्था से सुनिश्चित नहीं होगी, इसके लिए समाज में संवेदनशीलता का विकास भी आवश्यक है। अतः सरकार द्वारा धार्मिक यात्राओं एवं पैदल विहार मार्गों के प्रति जनशिक्षा, सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान और शिक्षण संस्थानों में नैतिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
हमारी प्रमुख माँगें:
1. रीवा दुर्घटना की उच्चस्तरीय (SIT) जांच और दोषियों पर कठोर दांडिक कार्यवाही.
2. "राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति" का शीघ्र निर्माण एवं संत विहार सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना.
3. प्रत्येक जिले में संत सुरक्षा नोडल अधिकारी की नियुक्ति.
4. राष्ट्रीय/राज्य संत सुरक्षा आयोग का गठन एवं 24x7 हेल्पलाइन की शुरुआत.
5. संत सुरक्षा हेतु स्थायी आपदा एवं चिकित्सा सहायता कोष की स्थापना.
समापन:
महोदय / महोदया, हमारा यह निवेदन किसी भी प्रकार के वैमनस्य या संघर्ष की भावना से प्रेरित नहीं है। हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी संत, मुनि, आर्यिका या साध्वी को ऐसी दुःखद परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
हम न्याय चाहते हैं, परंतु प्रतिशोध नहीं।
हम सुरक्षा चाहते हैं, परंतु विशेषाधिकार नहीं।
हम एक संवेदनशील व्यवस्था चाहते हैं, ताकि भारत की महान संत परम्परा सुरक्षित और संरक्षित रह सके।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि उपर्युक्त विषयों की गंभीरता को समझते हुए इन पर शीघ्र, न्यायोचित एवं सकारात्मक कार्यवाही करने की कृपा करें। सम्पूर्ण संत समाज एवं धर्मप्रेमी नागरिक सदैव आपके आभारी रहेंगे।
सधन्यवाद।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
नाम: ________________________
पद/संस्था: _________________________
मोबाइल: _____________________
दिनांक: _____________________
स्थान: _____________________
🚨 1. अभियान की पृष्ठभूमि
रीवा में आर्यिकाओं की दुर्घटना में हुई दुःखद मृत्यु ने सम्पूर्ण जैन समाज एवं संत परम्परा को झकझोर दिया है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि यह प्रश्न है—
- साधु-संतों की सुरक्षा का
- प्रशासनिक संवेदनशीलता का
- अहिंसा संस्कृति के संरक्षण का
- राष्ट्र की आध्यात्मिक धरोहर की रक्षा का
🎯 2. अभियान के उद्देश्य
तात्कालिक उद्देश्य
- रीवा दुर्घटना के दोषियों पर कठोर कार्यवाही
- पीड़ित संत समाज को न्याय
- संत विहार मार्गों की सुरक्षा
दीर्घकालीन उद्देश्य
- संत सुरक्षा नीति बनाना
- राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना
- जन-जागरण अभियान चलाना
- संत विहार सुरक्षा नेटवर्क तैयार करना
🏛️ 3. अभियान की संरचना
राष्ट्रीय स्तर
- संरक्षक मंडल: आचार्य, मुनि, आर्यिका, संत एवं विद्वान
- राष्ट्रीय संचालन समिति
- राष्ट्रीय संयोजक & सह संयोजक
- मीडिया प्रभारी & विधि प्रकोष्ठ प्रमुख
- प्रशासनिक समन्वय & डिजिटल अभियान प्रमुख
प्रदेश स्तर
- प्रदेश संयोजक
- प्रदेश मीडिया प्रभारी
- प्रदेश युवा प्रमुख
जिला स्तर
- जिला संयोजक
- युवा टोली
- सोशल मीडिया टोली
- संत सुरक्षा स्वयंसेवक
⭐ 4. अभियान के पाँच प्रमुख आयाम
(1) न्याय
दोषियों पर कठोर कानूनी कार्यवाही
(2) सुरक्षा
संत विहार सुरक्षा व्यवस्था
(3) जागरूकता
जनमानस में संवेदनशीलता
(4) संगठन
स्थायी स्वयंसेवक तंत्र
(5) नीति निर्माण
सरकारी स्तर पर स्थायी व्यवस्था
🚀 5. अभियान के चरण
प्रथम चरण: जन-जागरण
- मौन रैली
- ज्ञापन / प्रेस वार्ता
- सोशल मीडिया अभियान
द्वितीय चरण: हस्ताक्षर
- लक्ष्य: 10 लाख हस्ताक्षर
- online एवं offline प्लेटफॉर्म
तृतीय चरण
- संत सुरक्षा सम्मेलन
- राज्य स्तर पर विराट आयोजन
चतुर्थ चरण
- राष्ट्रीय संत सुरक्षा अधिवेशन
- दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति
6. युवाओं की भूमिका
स्वयंसेवक दल कार्य:
- विहार मार्ग निरीक्षण
- प्रशासनिक समन्वय
- यातायात एवं ट्रैफिक सहायता
- आपातकालीन चिकित्सा सहयोग
8. प्रस्तावित कार्यक्रम
- संत सुरक्षा सप्ताह व दिवस
- संत सुरक्षा शपथ ग्रहण
- संत सुरक्षा राष्ट्रीय संगोष्ठी
- संत सुरक्षा जागरण यात्रा
9. वित्तीय व्यवस्था
- पूर्णतः स्वैच्छिक सहयोग
- पारदर्शी लेखांकन नीति
- स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट व्यवस्था
- सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्ट प्रणाली
📱 7. डिजिटल अभियान (Hashtags)
माँगपत्र (Demand Charter) संक्षिप्त विवरण
रीवा दुर्घटना की उच्चस्तरीय (SIT) जांच
समयबद्ध निष्पक्ष जांच एवं सार्वजनिक रिपोर्ट का प्रकाशन।
दोषियों पर कठोर कानूनी दंड
गैर-इरादतन हत्या सहित सुसंगत धाराओं में त्वरित न्यायालय सुनवाई।
राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति
भारत सरकार द्वारा संतों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की घोषणा।
संत विहार सुरक्षा प्रोटोकॉल
सुरक्षित पद-विहार हेतु देश के समस्त राज्यों में मानक संचालन व्यवस्था (SOP)।
संत विहार मार्ग सुरक्षा योजना
संवेदनशील मार्गों का चिन्हांकन, गति नियंत्रण एवं चेतावनी बोर्ड स्थापना।
विशेष पुलिस समन्वय अधिकारी
बड़े विहार क्षेत्रों में प्रशासनिक पुलिस नोडल समन्वयकों की नियुक्ति।
भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण
विहार मार्गों पर रात्रि नियंत्रण, स्पीड लिमिट और विशेष हाईवे पेट्रोलिंग।
राष्ट्रीय संत सुरक्षा आयोग
सुरक्षा मानकों की निगरानी हेतु भारत सरकार के अंतर्गत आयोग का गठन।
संत सुरक्षा हेल्पलाइन
आपातकालीन सहयोग हेतु देशव्यापी 24×7 आपातकालीन राष्ट्रीय हेल्पलाइन।
संत विहार बीमा व आपदा कोष
समस्त धार्मिक परम्पराओं के पद-विहारी संतों हेतु समर्पित सहायता कोष।
संकल्प
“हम भारत सरकार एवं राज्य सरकारों से निवेदन करते हैं कि संत समाज की सुरक्षा को केवल धार्मिक विषय न मानकर राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का विषय माना जाए तथा उपर्युक्त माँगों पर शीघ्र कार्यवाही की जाए।”