महावीर के संदेशों के प्रति लोगों में श्रद्धा और उत्साह क्यों नहीं दिखाई देता?

150 150 admin
शंका

जब से मैं यात्रा कर रहा हूँ तब से मेरे मन में एक विचार चल रहा है
“महावीर भगवान के संदेशों का हमसे बस इतना नाता है
दीवारों पर लिख जाता है और दीवाली पर पुत जाता है।”
महावीर के संदेशों के प्रति श्रद्धा और उत्साह क्यों नहीं दिखाई देता?

संजीव जैन, सांगानेर संस्थान

समाधान

सिद्धान्त अलग होता है और उसका आचरण अलग होता है। हम सब लोगों को भगवान महावीर पर श्रद्धा है, जन-जन को महावीर भगवान पर श्रद्धा है। लेकिन जरूरी नहीं है कि जो महावीर का श्रद्धालु हो वह महावीर का अनुयायी भी बने। इन दोनो में बहुत फर्क है। यह अपनी-अपनी भूमिका के अनुरूप होता है। 

महावीर भगवान को अपने जीवन का आदर्श मानना और महावीर भगवान के जीवन आदर्शों को अपने जीवन में उतारना, दोनों अलग अलग चीजें हैं। भाग्यशाली है वो लोग जो भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में उतार कर अपना जीवन आदर्श बनाते हैं। पर वे लोग भी कोई साधारण नहीं, जिन्होेंने अपना आदर्श भगवान महावीर को बना रखा है। आज अगर हम भगवान महावीर के प्रति श्रद्धालु बने हैं तो कल उनके आदर्शों का अनुकरण करके अपने जीवन को भी आदर्श बनाने में सफल हो सकते हैं।

Share

Leave a Reply