छुट्टियों में घूमने कहाँ जाएँ?

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शंका

आजकल लोग दीवाली के तुरन्त बाद घूमने-फिरने चले जाते हैं, क्या ये सही है? अगर नहीं तो दीवाली वेकेशन का क्या लाभ लेना चाहिए ताकि बच्चों को भी सही संस्कार मिलें?

श्री राजति ध्रुव, जर्मनी

समाधान

गृहस्थों के जीवन में आमोद-प्रमोद, सैर-सपाटा, मनोरंजन भोग भी उनके जीवन में एक अंग है। वे साधु नहीं हैं, धर्मी भले ही हों पर संयमी नहीं, इसीलिए वे चले जाते हैं। पुराने समय में भी राजा महाराजा, सेठ साहूकार मनोरंजन की दृष्टि से घूमने फिरने के लिए ऐसे सैर-सपाटे आदि के लिए निकलते थे, क्रीड़ाएँ करते थे, वनविहार को जाया करते थे। इसलिए अगर कोई घूमने फिरने जाए तो मैं उस पर रोक लगाने की बात नहीं करता; लेकिन मैं कहूँगा कि भैया कितना घूमोगे? घूमते- घूमते तो अनन्त काल बीत गया और संसार के परिभ्रमण की स्मृति तुम्हें है और उससे बचना चाहते हो तो इधर-उधर घूमने की जगह अपने दिमाग को घुमाओ और सही रास्ते पर लगाओ। जब भी अवसर मिले अच्छे कार्यों में लगो, छुट्टियों में घूमने फिरने जाने के साथ-साथ तीर्थ यात्रा भी जाओ, गुरुओं के सानिध्य में भी जाओ, बच्चों को भी साथ ले जाओ। 

कई बार कुछ बच्चे आकर कहते हैं “महाराज! हमारे पेरेंट (माता-पिता) को तो केवल महाराज जी दिखते हैं या तीर्थ दिखते हैं, हमें इंजॉय करने का मौका ही नहीं देते।” एक परिवार के बच्चे ने जब मेरे सामने शिकायत की तो मैं कुछ बोला नहीं, उनके माता-पिता की तरफ देखा तो पिता बोला “महाराज! हम सोचते हैं कि बच्चों को थोड़ा संस्कार मिले”, बेटे ने तपाक से कहा “महाराज! इनसे पूछिए हमारी उम्र में यह कितना महाराज जी के पास जाते थे?” पिता ने तुरन्त बात को समझा और कहा “ठीक कहते हैं, मैं अपने जीवन के ३५ वर्ष के बाद मुड़ा। निश्चित ही मुड़ने से पहले मैं जहाँ था, आज मेरे बेटे मुझसे बहुत आगे हैं। मैं इससे बहुत पीछे था।” मैंने कहा “देखो भाई, बच्चों के मन में धर्म की भावना जगाओ, थोपो मत। इनकी भावनाओं का भी ख्याल रखो, जिस सोसाइटी में ये रहते हैं जैसे लोगों के मध्य रहते हैं, इनके अन्दर भी अनेक प्रकार की उम्मीद और भावनाएँ जागृत होती है, उनके अनुरूप ये सारे कार्य करते हैं तो आप ऐसा करें कि साल में दो बड़ी छुट्टियों में  एक छुट्टी में तुम बच्चों के मन की जगह जाओ और एक छुट्टी में तुम अपने मन की जगह जाओ, बैलेंस बना रहेगा।” मामला ठीक हो गया, मैं समझता हूँ हर पेरेंट्स अगर ऐसा कर सकता है, तो बहुत अच्छा सा सामंजस्य बनेगा।

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