क्या जेटपंप, हैंडपंप का पानी शुद्ध है?

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शंका

अभिषेक, चतुर्विध संघ के आहार आदि की व्यवस्था के लिए कुएँ के जल को शुद्ध माना गया है। वर्तमान परिपेक्ष में कुएँ की उपलब्धता बहुत कम है और शुद्धता भी नहीं बची है, तो क्या जेट पंप या हेंडपम्प के पानी को शुद्ध माना गया है? क्या यह व्रत आदि में उपयोग किया जा सकता है?

समाधान

जेटपम्प व हेंडपम्प के पानी को शुद्ध भले कहें पर वह प्रासुक नहीं हैं। प्रासुक इस sense में नहीं है क्योंकि उनमें आप जल नहीं छान सकते, जीवाणी नहीं कर सकते। मोटर से पानी को खींचते हैं तो मोटर से पानी को खींचने से पानी का मन्थन हो जाता है, तो उससे बिलछानी डालने का कोई मतलब नहीं निकलता। इसके बहुत अच्छे दो विकल्प आ गए हैं और उनका आप पालन करें तो दोनों काम हो सकतें है। एक तो आप 12 इंच या 10 इंच या 7 इंच की बोरिंग करके उसमें 4 इंच की बाल्टी डाल सकते हैं। अहिंसा जिवाणी यन्त्र जिसके बारे में मैंने पहले भी चर्चा की है, उसमें पानी मोटर से नहीं खिचता, बाल्टी मोटर से खींची जाती है, तो जिवाणी आराम से हो जाती है। उसकी बहुत अच्छी विधि है और लोगों ने कई जगह लगाया है। जयपुर में कई मन्दिरों में लगा है, वह कर लें। 

शहरों में आजकल बोरिंग पर प्रतिबंध है, बहुत मुश्किल हो जाती है। आप के लालसोट जैसे जगह में तो शायद प्रतिबंध नहीं होगा तो आप अभी से ऐसा बोरिंग करा लें और डीप बोरिंग करा लें ताकि आप उससे हमेशा अभिषेक-पूजन के लिए पानी लेते रहें और साधु-सन्त आए तो कमी न पड़े। एक बहुत अच्छा विकल्प पानी संग्रह, बारिश के जल को संग्रहित करने की व्यवस्था बनाइए, अपने मन्दिर में, अपने घर में 20, 25, 30,000 लीटर का टंका बनाइये। बरसात का पानी सालों खराब नहीं होता, उसमें कीड़े नहीं पड़ते। आप ऐसा सिस्टम (system) बनाए कि छत से पानी जो बह जाता है, वह बहने की जगह, पहले बारिश का पानी तो बहा दो, उसके बाद जब भी बारिश हो 10 से 15 मिनट तक पानी बहने दीजिए और उसके उपरान्त जब पानी चाँदी जैसा हो जाए तो उसे अपनी टंकी के वाल्व को खोल करके उसमें स्टोर (store) कर लीजिए और उस पानी को एकदम एयरटाइट (air tight) ढक्कन से बंद करके रखिए। उसमें जब आप को पानी की जरूरत है, ढक्कन थोड़ी देर के लिए खोलिये, बाल्टी से पानी निकालें और छान करके उसकी जीवाणी उसमें ही डाल दीजिए। वो अमृत है, एक प्रकार से डिस्टिल वाटर (distill water) है जो सूर्य के द्वारा वाष्पीकृत होकर के तैयार हुआ है। उस पानी में यदि मिट्टी के कण न लगे और उस पानी में यदि सूर्य का प्रकाश न जाए तो कई साल तक वह पानी सुरक्षित रह सकता है न उसका स्वाद बिगड़ेगा, न उसमें जीव उत्पत्ति होंगी। यह व्यवस्था सब को करना चाहिए, व्यक्तिगत रूप से अपने घरों में भी करें और मन्दिरों में भी करें। सरकार भी उसको बहुत बढ़ावा दे रही है। इसका पूरा का पूरा केमिकल रिपोर्ट (chemical report) भी आया है, इस पानी में किसी भी प्रकार की हानि नहीं है बल्कि आर.ओ. (RO) के पानी से भी शुद्ध पानी है। सबसे शुद्ध पानी जिसमें प्राकृतिक रूप से सारे मिनरल्स (mineral ) है तो वह आप लोग अपने घरों में ईशान कोण में एकदम वाटरप्रूफ (waterproof) टांका बना सकते हैं। राजस्थान में तो यह बात अछूती नहीं है कि नागौर, लाडनू, सुजानगढ़ आदि घरों में ऐसे टाँके सदियों से बनते रहे हैं। जिससे बारिश के जल से लोग काम करते हैं। 

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