दान की राशि से पढ़ना, पुण्य है या पाप?

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शंका

हम ज्ञानसागर गुरुकुल के छात्र हैं और हम दान की राशि से पढ़ते हैं। ये पुण्य है या पाप?

समाधान

जो तुम्हें पढ़ा रहे हैं, उन्हें तो पुण्य मिल रहा है। तुम मन लगाकर पढ़ो, अपना जीवन बनाओ और भविष्य में धर्म और संस्कृति की प्रभावना में लग जाओ तो तुम्हें महा पुण्य का भागी बनने का सौभाग्य मिलेगा। यह मत देखो कि “हम दान के पैसे से पढ़ रहे हैं तो यह पुण्य है या पाप?” यह सोचो – “दान के पैसे से लोग मुझे पढ़ा रहे हैं, उनका पुण्य कहीं खंडित न हो इसलिए मैं मन लगाकर पढ़ूँ ताकि उनके पैसे का दुरुपयोग न हो।” मन लगाकर नहीं पढ़ोगे तो शुद्ध पाप पाओगे। जिस लक्ष्य और जिस उद्देश्य को लेकर तुम वहाँ गए हो, उसके लिए तुम्हारे ऊपर समाज के लोग खर्च कर रहे हैं तो तुम्हें चाहिए कि तुम अपने व्यक्तित्त्व को ऐसी ऊँचाई दो, ऐसा निखारो कि आने वाले दिनों में जब पढ़ लिखकर आगे बढ़ो; जहाँ खड़े हो वहाँ से जिनशासन की जय की अनुगूँज फैले। जिन शासन की प्रभावना हो।

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