घर में बाई का काम करना और अशुद्वि में आना क्या उचित है?

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शंका

आज के इस आधुनिक युग एवंं व्यस्त दिनचर्या में अधिकतर दिगम्बर जैन के घरों में बंगाली बाइयाँ काम करने के लिए आती हैं। उनका खान-पान जैन आगम के बिल्कुल विरुद्ध होता है, उनके स्वयं के घर में मांस, अंडे, शराब का नित्य ही सेवन होता है। कई बार वह बाईयाँ सवेरे बिना नहाए-धोए भी आती हैं। सफाई के साथ वह बर्तन भी साफ करती हैं। यहाँ तक कि वह खाना भी बनाती है। ऐसे जैनियों के घरों में चौके भी लगते हैं और आहार भी होते हैं तो क्या इसमें भारी दोष नहीं लगता? कृपया मार्गदर्शन करें।

समाधान

बिल्कुल! भारी दोष है। जो स्त्रियाँ मासिक के दिनों में शुद्धि का पालन नहीं करती, वह सदैव सूतक ग्रस्त होती है और उसके घर में सूतक होता है। उसकी रिद्धि -सिद्धि खत्म हो जाती है। पहला प्रयास तो यह है कि मासिक की शुद्धि प्रत्येक स्त्री को रखना चाहिए और जो पालन नहीं करती उनको चौके में प्रवेश तो होना ही नहीं चाहिए। यदि चौके में प्रवेश कर रही हैं तो वह तो सूतक ग्रस्त है और सूतक ग्रस्त व्यक्ति के द्वारा दिया गया दान दायक-दोष की श्रेणी में आता है। उसे दायक दोष कहते हैं। जिनके घर में ऐसी व्यवस्था नहीं है उन्हें घर की शुद्धि करनी चाहिए। इस समय नेगेटिव एनर्जी का फ्लो बहुत बढ़ जाता है। हमारे यहाँ छुआछूत कोई रूढता नहीं है, उसके पीछे भी विज्ञान है। नकारात्मकता ऊर्जा से हम अपने आप को बचा सकें। कम से कम भोजन बनाते समय, भोजन करते समय, परोसते समय किसी तरह की नकारात्मकता हावी न हो। एक डॉक्टर मेरे सम्पर्क में थे, वो जो भी खाते उल्टी हो जाती। डायग्नोसिस कराया तो रिपोर्ट में कुछ न निकला। मैंने उसकी पत्नी की तरफ देखा और पूछा कि तुम यह बताओ मासिक के दिनों में शुद्धि का ध्यान रखती हो? डॉक्टर ने कहा महाराज जी, हम इन बातों पर विश्वास नहीं करते, यह तो नेचुरल प्रोसेस है। मैंने कहा नहीं, आपकी बीमारी की जड़ यही है। इसी कारण आपको यह सब हो रहा है। आप अपने घर के चौके की पूरी शुद्धि करो, सारा सामान निकाल कर बाहर करो, घर के चौके के सभी सामग्री को उन्होंने बाहर करवाया। घर की शुद्धि करवाई। घर की शुद्धि करने के उपरान्त जब नए सिरे से भोजन बनाना शुरू किया, 15 वें दिन उनकी उल्टी बंद हो गई। आज लगभग 11 बरस हो गए। अब बिल्कुल स्वस्थ्य है। एक महिला ने कहा था कि हमने चौथे दिन तुलसी में पानी डाल दिया तो तुलसी जल गई। इसलिए शुद्धि का पालन होना चाहिए। जिस घर में ऐसी महिलायें या बंगाली बाईयाँ काम करती है, जहाँ शुद्धि नहीं है, उन्हें चौंका नहीं लगाना चाहिए। शुद्ध वस्त्र पहनकर के दूसरे के घर में आहार दे सकते हैं।

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