बहुओं का व्यवहार कैसा हो?

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शंका

जब कोई लड़की शादी होकर ससुराल जाती है, तो कहा जाता है कि “पूरा समर्पण ससुराल की तरफ रहना चाहिए”; लेकिन यही समर्पण उसे अपने सास-ससुर या दूसरी तरफ से नहीं मिलता है, उस स्थिति में उसे क्या करना चाहिए?

समाधान

हमारा जो काम है वह हम काम करें। एक है भाव और एक है प्रतिभाव। भाव – मैं अच्छा भाव रखूं यह मेरे हाथ में है और प्रतिभाव- मेरे अच्छे भाव का मुझे अच्छा सत्कार मिले। सत्कार मिले या न मिले पर मैं अपने भाव को खराब न करूँ। “मुझे जो करना है वह मैं करूँ”, सामने वाला यदि नहीं कर रहा है, तो उनको कोसने की जरूरत नहीं है।

एक परिवार में माँ, बेटा-बहू- और कोई चौथा सदस्य नहीं था। दो-तीन दिन तक तो ठीक-ठाक रहा, चौथे दिन से उसकी सास ने, जो बड़ी कर्कशा थी, रात दिन अपनी बहू के ऊपर आग उगलते रहती थी, उल्टा-सीधा बोलते रहती थी। जो बहू थी बहुत शांत, विनम्र और सहनशील थी, वह अपनी सास की बातें सुनती और कोई जवाब नहीं देती। रोज की भाँति एक दिन वह अपनी बहू पर गरज रही थी। बहू ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो वह बोली “यह कैसी मिट्टी की पुतली है? अरे धरती पर भी लात मारो तो आवाज आती है, हे भगवान न जाने किस माटी की पुतली को मेरे घर भेज दिया, तेरे मुँह में जीभ नहीं है क्या?” उसने कोई प्रतिवाद नहीं किया, यह आवाज पड़ोसन तक पहुँच गई। पड़ोसन ने सुना तो उसे बहुत दर्द हुआ, वह आई सामने और उसकी सास को ललकारते हुए कहा- “देवी सी बहू तेरे घर में आई है, इतनी सीधी-सच्ची बहू और उसके ऊपर इस तरह का व्यवहार कर रही है, इस तरह का उल्टा- सीधा बोल रही है, झगड़ना चाहती है, अगर तुझे झगड़ना ही तो आ, मुझसे झगड़, मैदान में मैं आती हूँ।” जब उसने ऐसा कहा तब तत्क्षण उस बहू ने आकर के कहा- “चाचीजी आप ऐसा न करें। यह मेरी माँ हैं और मेरी माँ मुझे मेरी गलती पर नहीं समझायेगी तो कौन समझाएगा। आप ऐसा न करें, आप मेरी माँ जी से एक शब्द न बोलें।” आप सुनकर ताज्जुब करोगे, बहू के इस अप्रत्याशित जवाब ने सास का ह्रदय परिवर्तित कर दिया, उसने अपनी बहू को छाती से लगा लिया। प्रेम में बहुत बड़ी ताकत होती है। हमें अपने भीतर झाँक करके देखना चाहिए “कहीं मेरा कोई इगो मेरे चारों तरफ दीवार के रूप में खड़ा तो नहीं है।” यदि वह खड़ा है, तो हम अपने सम्बन्ध को ठीक ढंग से मेंटेन नहीं कर पाएंगे।

पुत्र की गलती के लिए भी सहन करना चाहिए क्योंकि वह उसकी अर्धांगिनी है, उसका आधा श्रेय और अश्रेय सब उसके हिस्से आता है, सहन कर लो। सहन करके ही आप पा सकती हो, कह कर के नहीं, इस सूत्र को लेकर के चलो।

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