माँ-बाप का सम्मान कितना जरूरी?

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शंका

मनुष्य अपने हाथों बनाए भगवान को पूजता है लेकिन जिसने मनुष्य को बनाया उनके साथ सही व्यवहार नहीं करता, ऐसा क्यों?

समाधान

यह बहुत गहरी बात है और इसमें हमें बहुत गम्भीरता से सोचना चाहिए। सन्त कहते हैं, “जो अपने माँ-बाप को सही सम्मान नहीं देता, उसका पूजा-पाठ, दान पुण्य, व्रत-उपवास सब व्यर्थ है केवल दिखावा है। क्योंकि जिसने तुम्हें जन्म दिया, जीवन दिया, संस्कार दिया उसके प्रति तुम्हारे ह्रदय में श्रद्धा होनी चाहिए। अगर उनके प्रति तुम्हारे मन में श्रद्धा नहीं है, तो भगवान की पूजा केवल दिखावटी पूजा है, तुम बुद्ध को पूज रहे हो भगवान को नहीं, तुमने भगवान को पहचाना ही नहीं।

माँ-बाप का आशीर्वाद भी प्रभु और गुरु के आशीर्वाद से कमज़ोर नहीं होता। वे लोग बड़े भाग्यशाली होते हैं जिन्हें गुरु और प्रभु के आशीर्वाद के साथ-साथ माँ-बाप की छत्रछाया लंबे समय तक मिलती रहती है, उनका आशीर्वाद मिलता रहता है। तो अपने माँ-बाप का सही तरीके से सम्मान करो, उनका सत्कार करो। उनके साथ ऐसा व्यवहार न करो जिससे उनके मन में उनकी संवेदनाओं को आघात पहुंचे, उनके प्रति ऐसा व्यवहार करो जिससे तुमको देखकर उनका सीना गर्व से फूल उठे। ऐसा आचरण करो, यही सही पूजा है, बाकी तो केवल पत्थर की पूजा है।

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