वैवाहिक क्रियाएं कहाँ तक उचित?

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शंका

विवाह में बाँध लगाना, मंढा चढ़ाना, कँगना बांधना आदि क्रियाएँ क्या मिथ्यात्त्व है? क्योंकि नेमिनाथ जी के वैराग्य प्रसंग में आता है कि वह कँगना तोड़कर चले गए थे।

दिनेश कुमार जैन, दिल्ली

समाधान

यह सामाजिक रीतियाँ है और इन्हें सम्यक्तव और मिथ्यात्त्व में नहीं लेना चाहिए। समाज की जो रीतियाँ हैं, समाज की अपनी अलग-अलग परम्पराएँ हैं, उन परम्पराओं के अनुसार पालन किया जाना चाहिए; यह हमारी सामाजिक पहचान भी बनती  है। कुरीतियाँ वह होती हैं, जिनसे हमारी आत्मशुद्धि में बाधा होती है और जिनसे हमारे सम्यग्दर्शन में मलिनता आती हो। जो सम्यक्त्व को मलीन करें, व्रतों में दूषण लगाएँ, ऐसी क्रियाओं से बचना चाहिए। लेकिन, जिनसे न तो सम्यक्त्व मलीन हो, न ही व्रत दूषित हो, ऐसी क्रियाओं को करने से कोई नुकसान नहीं है। इनका निषेध करना ठीक बात नहीं है।

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