प्रतिष्ठित मूर्तियाँ मकान में रहना कौन से पुण्य का उदय है?

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शंका

जब तेन्बी का मन्दिर कंप्लीट नहीं हुआ था तो पंचकल्याणक से प्रतिष्ठित श्रीजी मेरे मकान पर रही थी। यह कौन सा पुण्य था जो मेरे को ऐसा सौभाग्य मिला कि श्रीजी की मूर्तियाँ मकान पर 45 दिन तक रही?

निखिल जैन, तेन्बी

समाधान

ये निश्चित तुम्हारा पुण्य था कि तुम्हारे यहाँ भगवान रहे पर थोड़ा पुण्य क्षीण था, इस कारण भगवान 45 दिन बाद चले गए। ऐसा पुण्य गाढ़ा करो कि अपने हाथों से, अपने द्रव्य से भगवान का सम्पूर्ण मन्दिर बनाओ और भव-भव का उद्धार करो। रोज भावना भाओ कि हे भगवान, मेरी जब सामर्थ्य बने तब अपने द्रव्य से आपका मन्दिर बनाऊँगा और स्थाई रूप से आप को पधराकर अपना जीवन आपके चरणों में अर्पित कर लूँगा।

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