जैन धर्म इतना प्राचीन होने पर भी इतना पीछे क्यों?

150 150 admin
शंका

जैन धर्म बहुत प्राचीन है फिर भी बौद्ध धर्म जो महावीर के समकालीन है उनका धर्म इतना बड़ा क्यों और जैनिज़्म (Jainism) पीछे क्यों?

वीरकुमार मेहता, गुलबर्गा

समाधान

इसके पीछे कई कारण हैं। एक समय था जब भारत में 80% आबादी जैन थी। समय बदला यहाँ की राजनीतिक परिस्थितियों में परिवर्तन हुआ और राजनीतिक संरक्षण के अभाव में जैन धर्म का बहुत विनाश हुआ। मेरे पास आँकड़े हैं कि राजा अमोघवर्ष के काल में 25 करोड़ जैन थे, राजा कुमार पाल के काल में 10 करोड़ बचे, फिर सम्राट अकबर के काल में 4 करोड़ एवं अविभाजित भारत में यह संख्या मात्र 2 करोड़ रह गई। वर्तमान में जनगणना के अनुसार भारत में करीब 47 लाख जैन हैं। हालाँकि यह संख्या सही नहीं है, हमारी संख्या इससे ज़्यादा है।

दिनों-दिन देश में जैनों के घटने के पीछे कई कारण बने। एक है राजनीतिक संरक्षण का अभाव। कुछ समय ऐसा भी आया जिस समय हमारे जैन मुनियों को स्वतंत्र विचरण में भी बाधा हुई जिसके कारण हमारी समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा हुआ जो जैन धर्म से बिल्कुल विमुख हो गया। जैसे एक जमाने में बिहार, झारखंड, बंगाल और उड़ीसा का क्षेत्र मुख्य रूप से जैन धर्म बाहुल्य इलाका था। आठवीं शताब्दी तक कलिंग का राष्ट्र धर्म जैन धर्म था। नीलकंठ साहू की कृति ‘उड़ीसा में जैन धर्म, इसमें उन्होंने उड़ीसा के जैन इतिहास को बहुत विस्तृत रुप में रेखांकित किया और बताया है कि आठवीं शताब्दी तक वहाँ जैन धर्म राष्ट्र धर्म था और उस समय कलिंग का विस्तार उससे दूर आंध्र तक था। उस इलाके में आज भी बहुत से सराक बन्धु हैं, जिनमें आज भी जैन संस्कृति है। उनके गोत्र 24 तीर्थंकरों के नाम से हैं, खान-पान भी काफी कुछ लोगों में ठीक है कुछ भटक गए हैं और अजैन हो गये हैं यह संख्या लाखों में है। यह तो एक उदाहरण है। ऐसी ही कई जनजातियाँ जैन धर्म से विमुख हो गईं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मुझे यह लगता है कि धर्म के गुरुओं का विचरण उधर नहीं हो सका। जैन धर्म के व्यापक नहीं बनने का कारण एक यह भी रहा कि कालान्तर में हम जैन लोगों की मानसिकता संकुचित हो गई, धार्मिक कट्टरताएँ आ गईं। मूल रूप से जो जैन तत्वज्ञान था उसको गौण करके ऊपरी क्रियाकलापों को ज़्यादा महत्त्व दिया जाने लगा। एक युग ऐसा भी आया जिसमें मन्त्र-तंत्र का बहुत अधिक प्रचार-प्रसार हुआ और मूल जैन धर्म क्षीण हो गया। कुछ जातीय कट्टरता भी जैन धर्म के विलुप्त होने का कारण बनी। 

बौद्ध धर्म भारत से बाहर फैला, भारत में तो बौद्ध धर्म लगभग लुप्तप्राय: हो गया था। वर्तमान में अंबेडकर के काल में दीक्षित 9 बौद्धों को छोड़ दें तो यह लगभग नगण्य ही हैं। बौद्ध धर्म मुख्यतः भारत से बाहर ही फैला क्योंकि बौद्ध साधुओं की चर्या के अनुकूल वातावरण वहाँ था और इसलिए उनके यहाँ विधान कर दिया गया कि वे मृत प्राणियों का माँस खा सकते हैं। जैन धर्म में एसा नहीं था तो जैन धर्म गुरु, तीर्थंकर, सन्त आदि भारत की सीमाओं से बाहर नहीं गये, इसलिये भी जैन धर्म की प्रभावना कम रही।

Share

Leave a Reply