दीपावली घर पर मनाएँ या तीर्थ क्षेत्र पर?

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शंका

दीपावली में पूरे परिवार के साथ तीर्थ क्षेत्र पर लाडू चढ़ाना ज़्यादा अच्छा है या घर में दीपावली मनाना?

समाधान

“मन में नया उद्योत होना” – यही सच्ची दीपावली है। नया उद्योत यानी नया प्रकाश, हम जीवन की नई दिशा तय करें। जीवन में एक नया प्रकाश, एक नई लाइट, नई रोशनी आई है यानी दीपावली आई है। यह जरूरी नहीं कि आप घर में दीपावली मनाएं, आपके मन में दीपावली होनी चाहिए। 

दीपावली यानी प्रसन्नता, आनन्द! यदि ऐसे समय में घर परिवार का मोह त्याग कर आप क्षेत्रों में दीपावली मनाते हैं तो कोई दोष नहीं, बल्कि मैं कहता हूँ कि देश भर के जैनियों को चाहिए कि दीपावली के दिन भगवान महावीर के चरणों में पावापुरी जाएं और वहाँ जाकर दीपावली मनाएँ। सब लोग लाभ-लोभ के चक्कर में पड़ते हैं और दीपावली का सम्बन्ध धन पैसे से जोड़ देते हैं। इसी दृष्टि से  लोग घर में दीपावली मानते हैं। घर में मनाई जाने वाली दीपावली लौकिक दीपावली होगी और तीर्थ क्षेत्र में मनाई जाने वाली दीपावली परमार्थिक दीपावली होगी। आप तय करें कि आप कौन सी दीपावली पसन्द करते हैं।

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