जैन-धर्म
Jain Religion
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मुनि श्री प्रमाणसागर जी
पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ श्री दिगम्बर जैन मंदिर,मीठापुर, पटना (बिहार) में विराजमान हैं.
झारखंड प्रान्त के हजारीबाग शहर में जन्मे मुनि श्री प्रमाणसागर जी, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रमुख शिष्यों में से हैं। अल्पवय में ही अंतर्यात्रा की ओर उन्मुख होने वाले मुनिश्री साधना, संयम और सृजन के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपका चिन्तन और अभिव्यक्ति कौशल हजारों - हजारों श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर भाव-विभोर कर देता है। धारा प्रवाह प्रवचन में शब्द-सौष्ठव एवं प्रस्तुतिकरण की मोहकता, मधुबन में बांसुरी की भांति प्रभावी है। आप हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत एवं अंग्रेजी के अधिकारी विद्वान के रूप में बहु-आदरित हैं। अध्ययनप्रियता, आपका पथ व संयम, आपकी शैली एवं साधना आपकी गुणधर्मिता है। आप आगम के गूढ़तम ज्ञाता, जिणवाणी के प्रखर प्रस्तोता हैं। आपकी बहु प्रशंसित कृति "जैन धर्म और दर्शन" विचार, अध्यात्म एवं चिन्तन - जगत में अनुठे अनुदान की भांति सर्वमान्य है। जैन आगम के गूढ़ तत्त्वों की सहज-सरल-सुबोध प्रस्तुति इस कृति का अनुपम वैशिष्ट्य है। "जैन तत्त्व विद्या" आपकी तत्त्वान्वेशी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।
 

भगवान महावीर महानिर्वाण महोत्सव

भगवान महावीर महानिर्वाण महोत्सव दिनांक 26 अक्टूबर 2011को श्री सिद्धक्षेत्र पावापुर जी (बिहार) में पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी एवं मुनि श्री विराटसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में,अभूतपूर्व धर्म प्रभावना के साथ सम्पन्न हुआ. अधिक जानने के लिए क्लिक करें.

साहित्य सृजन
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श्री सेवायतन
तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी में सर्वांगीण विकास का
सम्यक् यतन
तीर्थ हमारे प्राण हैं. तीर्थों की सुरक्षा हमारा परम दायित्व है. परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं परम पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की मंगल प्रेरणा से श्री सेवायतन का शुभारंभ हुआ. तीर्थों की सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है कि क्षेत्र के मूल निवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार मिले जिससे कि वे क्षेत्र के विकास एवं सुरक्षा से अपने आप को जोड़ सकें, इसी दिशा में कार्यरत है श्री सेवायतन .. अधिक जानने के लिये क्लिक करें.
श्री सेवायतन - हिन्दी संस्करण

ShreeSevaytan - English Version
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गुणायतन
आत्मा से परमात्मा की यात्रा - आत्मविकास के सोपान
जैन दर्शन में आत्मशक्तियों के विकास अथवा आत्मा से परमात्मा बनने की शिखर यात्रा के क्रमिक सोपानों को चौदह गुणस्थानों द्वारा बहुत सुंदर ढंग से विवेचित किया गया है. जैन दर्शन में जीव के आवेगों-संवेगों और मन-वचन-काय की प्रवत्तियों के निमित्त से अन्तरंग भावों में होने वाले उतार-चढ़ाव को गुणस्थानों द्वारा बताया जाता है. गुणस्थान जीव के भावों को मापने का पैमाना है. परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं परम पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की मंगल प्रेरणा से मधुबन, सम्मेदशिखरजी में निर्मित होने जा रहे, धर्मायतन "गुणायतन" में इन्हीं चौदह गुणस्थानों को "दृष्य-श्राव्य प्रस्तुति" के माध्यम से दर्शनार्थियों को समझाया जायेगा. परिसर में बनने वाले जिनालय, जैन स्थापत्य और कला के उत्कृष्ट उदाहरण होगें. अधिक जानने के लिये क्लिक करें.... गुणायतन
www.gunayatan.com
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तीर्थेश: श्रीसम्मेदशिखर
गुणायतन एवं श्रीसेवायतन का मुखपत्र - डाउनलोड करने हेतू क्लिक करें-तीर्थेश:श्रीसम्मेदशिखर Part1 Part2 Part3 Part4 Part5
मुनिश्री के प्रवचनों की निशुल्क सी.डी./ डी.वी.डी प्राप्त करने के लिए contact@munipramansagar.net पर ई-मेल भेजें.
पूज्य महाराजश्री द्वारा रामायण-गीता की आध्यात्मिक सरस विवेचना, गया (बिहार) में दिए गये विशेष प्रवचन - क्लिक करें: प्रवचन
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Last Updated 24-01-2012
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