धर्म जीवन का आधार
शाश्वत सुख जीवन का लक्ष्य है । उसका स्त्रोत है मोक्ष । मोक्ष का मार्ग है आत्मस्वभाव रूप का अवलम्बन । आत्मस्वभाव के दशलक्षण है : उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिञ्चन्य और बह्मचर्य। इनका मर्म का हद्याह्रादक और हद्यस्पर्शी उद्घाटन किया गया है , प्रस्तुत ग्रन्थ में , एक़ युवा प्रतिभाशाली बहु श्रुत और अनुभूतियों की गहराई में उतरे हुए दिगम्बर संत की अतिशयकारी लेखनी के द्वारा , जिनका नाम है मुनि श्री प्रमाणसागर जी, जिनकी आत्मा सदा इस युग के विश्वविश्रुत संतशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी के वात्सल्यमय आशीर्वाद से देदीप्यमान रहती है । धर्म जीवन का आधार एक ऐसी कृति है , जिसके अनुशीलन से धर्म के दशलक्षणों का स्वरूप सरलतया हद्यगम होगा और उनकी अभिव्यक्ति के लिए मन बैचन हो उठेगा।