गुणायतन: आत्म विकास का दिव्य सदन

 

 

 

 

 

 

 

 

क्या है गुणायतन?
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी के पावन आशीष तथा उनके परम प्रभावक शिष्य पूज्य मुनिवर श्री प्रमाण सागरजी की पावन प्रेरणा , परिकल्पना और अनुभव अर्जित संपदा से बनने जा रहा है , जैन दर्शन के चौदह गुणस्थानों की कलात्मक उत्कृष्ट आधुनिकतम तकनीक से निर्मित चेतनामयी आलोक सृष्टि , जिसका नाम है गुणायतन। गुणायतन की संरचना कला व स्थापत्य का अनुपम/ अद्भुत /अलौकिक प्रस्तुतिकरण ही नहीं है अपितु प्रकाश, ध्वनि संयोजन एवं संगीत के माध्यम से जीवंत-प्राणवन्त एवं ऊर्जस्वित जैन सिद्धान्त का दर्पण भी है तथा परम लक्ष्य का उपक्रम भी। जब-जब आगम पढ़ते हैं तो तब-तब सोचते हैं –
काश हम भी होते समवसरण में; सुनते भगवान की दिव्य ध्वनि; देखते तीर्थंकरों का श्रीविहार; सीखते सौधर्म की भक्ति; झुकते देखते शतेन्द्र; जानते अपने सातों भव; पहचानते अपना गुणस्थान.....

इन्हीं भावनाओं की साकारता को आकार दे रहा है गुणायतन-

क्या है गुणायतन ?