गुणायतन: आत्म विकास का दिव्य सदन |
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जैन दर्शन के अनुसार आत्मा ही परमात्मा है, प्रत्येक आत्मा अनंत शक्तियों का पुंज है। किसी आत्मा में यह शक्ति पूर्ण प्रकट होती है तो किसी में कम, जैसे काली अंधियारी सघन घटाए सूर्य के प्रकाश को मंद कर देती है वैसे ही कर्मावरण की सघन घटाएँ आत्मा शक्तियों को प्रभावित करती हैं, जैसे जैसे माघ घटाए विरल होती हैं वैसे वैसे सूर्य का प्रताप और प्रकाश बढ़ने लग जाता है, मेघमालाओं के पूर्ण नष्ट होने पर सूर्य का प्रकाश और प्रताप पूर्णतः प्रकट हो जाता है वैसे ही कर्मावरण की घटाएँ जैसे जैसे क्षीण होती हैं, आत्म शक्तियों का प्रकाश बढ़ने लगता है तथा कर्मावरण के पूर्ण नष्ट हो जाने पर आत्मिक शक्तियों की पूर्ण अभिव्यक्ति हो जाती है, यही परमात्म अवस्था है, यही आत्मिक ज्योति और अंतश्तेज की पराकाष्ठा है एवं मनुष्य भव की सार्थकता है, यही हमारा परम लक्ष्य भी है। इसी लक्ष्य में सहायक बनेगा गुणायतन। |
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